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क्या आगामी संसदीय सत्र हवाई अड्डों, होटलों और रेस्टोरेंटों को100% धूम्रपान-मुक्त करेगा?

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 जयपुर,15 जुलाई 2021 (डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, राजस्थान केन्सर फ़ाउंडेशन, जयपुर )हमारे देश के तम्बाकू नियंत्रण क़ानून (सिगरेट और अन्य तम्बाकू पदार्थ नियंत्रण अधिनियम, 2003- कोट्पा) के सेक्शन 4 के वर्ष 2008में हुए संशोधित भाग- धूम्रपान हेतु चिन्हित क्षेत्र (डेज़िग्नेटेड स्मोकिंग ऐरिया- डीएसए) लोकस्थानों में निष्क्रिय धूम्रपान नियंत्रित कर पाने में एक बड़ा अवरोध है।कल बेंगलारु स्थित नैशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी (एन.एल.एस.आई.यू.) द्वारा इस विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित की गयी जिसमेंतम्बाकू नियंत्रण में अग्रणी प्रादेशिक एनजीओ राजस्थान केन्सर फ़ाउंडेशन, जयपुर के डॉ. राकेश गुप्ता ने भी एक प्रतिभागी के तौर पर भाग लिया।

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क़ानून का यह भाग निर्देशित करता है कि केवल हवाई अड्डे और 30 व्यक्तियों से अधिक ठहरने या बैठने की क्षमता वाले क्रमश: होटल और रेस्टोरेंट ही ‘यदि चाहें तो’डीएसएस्थापित कर सकेंगे। इन डीएसओं की परिभाषित विशिष्टाओं का मूल उद्देश्य है इन स्थानों पर आ रहे, कार्यरत अथवा रिहायशी गैर-धूम्रपायियों को धूम्रपान से उत्पन्न विषैले धुएँ से बचाना जो कि देश के संविधान के आर्टिकल 22द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार के अंतर्गत आता है। अमेरिका के जॉन हॉप्किन्स स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की सेजल सराफ ने बताया किवर्ष 2014 मेंउनकी संस्था द्वारा भारत के 8 प्रदेशों में किए गए एक अध्ययन में6,000 से अधिक चयनित डीएसओं के निरीक्षण में ‘ग्राहकों की सम्भावित कमी का भय’ और ‘उसका व्यवसाय पर हानिकारक आर्थिक प्रभाव’ के चलते केवल 4%स्थानों में ही क़ानून में परिभाषित विशिष्टाओं की सम्पूर्ण पालना होती जानी गयी है।

अतःवेबिनार में भाग लेने वाले सभी वार्ताकारों और पेनेलिस्टों (तेलंगाना के होटेल और रेस्टोरेंट यूनियन के अध्यक्ष, बेंगलारु स्थित कारा रेस्टोरेंट की मालिक, बेंगलारु के ही एक केन्सर चिकित्सक, यू.पी. के उच्च पदेन सरकारी अधिकारी, भारत और अमेरिका के अग्रणी तम्बाकू नियंत्रण कर्मी, सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली के वकील और एन.एल.एस.आई.यू. के आयोजक प्राचार्य व संस्थानिक दल) ने व्यापक चर्चा के द्वारा इस मुद्दे के समाधान- हवाई अड्डों, होटलों और रेस्टोरेंटों को 100% धूम्रपान-मुक्त करनेका पुरज़ोर समर्थन किया।

सभी प्रतिभागियों की यह माँग भी थी कि भारत सरकार व उसके स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ सभी संसदीय जन-प्रतिनिधीइसे अपनीमहती ज़िम्मेदारी मानते हुए सम्मिलित रूप से संसद के 19 जुलाई से आरम्भ होने वाले मानसून सत्र में पूर्व-लम्बित कोट्पा अधिनियम में संशोधन बिल 2020 को सम्पूर्णता से पारित करा (इस क़ानून के अन्य संशोधनों सहित) देश के सभी हवाई अड्डों, होटलों और रेस्टोरेंटों को 100% धूम्रपान-मुक्त करायें। ऐसा जनस्वास्थ्य के व्यापक हित के सन्दर्भ में शीघ्रतिशीघ्र किया जाना उचित तो होगा ही, सामयिक भी।सभी ने यह भी माँग की कि क़ानून इस बार मज़बूत हो उसके लिए इसकी संरचना में से ‘किंतु’, ‘यदि’, ‘जबकि’, इत्यादि, जैसे शब्दों को उपयोग में ले उसे कमजोर ना बनाया जाये।

सी.टी.एफ.के. की निदेशक, वंदना शाह ने बताया कि दुनियाँ के कई शहरों और देशों में (उदाहरणार्थ, न्यूयार्क, केलिफ़ोर्निया, वियतनाम,इत्यादि) यह पिछले दो दशकों में स्थापित हो चुका है कि होटलों और रेस्टोरेंटों को पूरी तरह से धूम्रपान-मुक्त (100%धूम्रपान-मुक्त) करने से इन स्थानों में व्यवसाय आर्थिक रूप से लाभान्वित ही हुए क्योंकि यहाँ आने वाले ग्राहकों और इनके कर्मचारियों ने ‘किसी तम्बाकू के धुएँ से युक्त स्थान’ की अपेक्षा यहाँ के ‘धूम्रपान-मुक्त वातावरण’ को ही प्राथमिकता देना चुना। इससे यह भी स्थापित हुआ कि होटलों और रेस्टोरेंटों को 100% धूम्रपान-मुक्त करना एक विजयी व्यवसायी निर्णय (विन- विन सिचुएशन) होता है।

 

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