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राजस्थान में कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति के तहत तीन महिला किसानों को ढाई करोड़ से अधिक का अनुदान मंजूर

राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 की राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की पहली बैठक

आठ परियोजनाओं के लिए 4.32 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत

जयपुर। राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 की राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की पहली बैठक में 8 परियोजनाओं के लिए 4.32 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। इनमें से ढाई करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान तीन महिला किसानों की परियोजनाओं के लिए मंजूर हुआ है। राज्य सरकार की पहली वर्ष गांठ पर लॉन्च इस नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 60 करोड़ रुपए की 39 परियोजनाओं के प्रस्ताव मिल चुके हैं।

प्रमुख शासन सचिव, कृषि नरेशपाल गंगवार की अध्यक्षता में गुरुवार को शासन सचिवालय में आयोजित बैठक में कृषि विपणन बोर्ड के प्रशासक एवं सदस्य सचिव तारा चन्द मीना ने बताया कि नीति के अन्तर्गत अब तक 6.35 करोड़ रुपये की 7 परियोजनाओ में 1.58 करोड़ रुपये का अनुदान जिला स्तरीय समितियों द्वारा स्वीकृत किया गया है। इनकी प्रथम किश्त भी लाभार्थियों को जारी की जा चुकी है। राज्य स्तरीय बैठक में आज 18.29 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं पर विचार किया गया। उनमें से 15.94 करोड़ रुपए की 8 परियोजनाओं में 4.32 करोड़ रुपए का अनुदान स्वीकृत करने तथा शेष 2 प्रकरण अपूर्ण होने के कारण उन्हें आगामी बैठक में रखने का निर्णय लिया गया।

इनमें तीन परियोजनाएं जोधपुर जिले की महिला किसानों की ओर से स्थापित की जा रही हैं। महिला काश्तकार गोमीदेवी को वेयरहाउस के लिए 87.50 लाख, नारायणी देवी को मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 75.97 लाख एवं मुन्नी सांखला को लहसुन-प्याज डिहाइड्रेशन प्लांट के लिए एक करोड़ रुपए का अनुदान मंजूर किया गया।

मीना ने बताया कि स्वीकृत की गई परियोजनाएं वेयरहाउस, क्लीनिंग, ग्रेडिंग, दुग्ध प्रसंस्करण, प्याज सुखाने आदि से सम्बन्धित है। साथ ही उन्होंने अवगत कराया कि नीति के अन्तर्गत इनके अलावा 35.35 करोड़ रुपए लागत की 22 अन्य परियोजनाओं के आवेदन पत्र विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन है।

समिति अध्यक्ष प्रमुख शासन सचिव, कृषि श्री नरेश पाल गंगवार ने नीति के अन्तर्गत 4 माह के अल्प समय में लगभग 60 करोड़ रुपए की 39 परियोजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त होने को सराहनीय बताया। उन्होंने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, नाबार्ड एवं शीर्ष सहकारी बैंक के प्रतिनिधियों को कृषकों एवं उद्यमियों को इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहित कर राज्य की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने का आह्वान किया। इससे कृषि प्रसंस्करण एवं सम्ब़द्ध क्षेत्रों यथा डेयरी, पोल्ट्री, शहद प्रसंस्करण, क्रय-विक्रय सहकारी समितियों व ग्राम सेवा सहकारी समितियों के स्तर पर कृषकों को भण्डारण, क्लीनिंग, ग्रेडिंग, पैकिंग आदि की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

गंगवार ने योजना के अन्तर्गत कृषकों एवं उनके संगठनों को निवेश राशि का 50 प्रतिशत एवं अन्य उद्यमियों को 25 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान तथा 5 से 6 प्रतिशत ब्याज अनुदान के प्रावधान का अधिकाधिक लाभ इच्छुक उद्यमियों को प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य में कृषि क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना, उनमें रोजगार का सृजन करने एवं किसानों को होने वाली फसलोत्तर हानि में कमी कर उन्हें बाजार के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने पर बल दिया।

बैठक में मौजूद वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी संभव उपाय शीघ्र ही किये जाने का आश्वासन दिया। बैठक में वित्त, आयोजना, कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन विभाग एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, नाबार्ड व राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अधिकारी उपस्थित थे।

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