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राशन डीलरों के हौसलों के आगे बेबस नजर आ रहा है प्रदेश का रसद विभाग

पॉश मशीन व ऑनलाईन राशन वितरण तकनीकी भी कम नही कर पाई राशन डीलरों के अवसरों को

लेखक
राजन चौधरी
स्वतंत्र पत्रकार 


सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार करने के लिए सरकार स्तर पर अथक प्रयास किये जा रहे है। जिसके चलते नवीनतम तकनीक का प्रयोग कर पॉश मशीन व ऑनलाईन राशन वितरण करवाना भी प्रारंभ किया जा चुका है। साथ ही संपूर्ण भारत में ‘एक देश-एक राशन कार्ड’ योजना लागू करने के लिए युद्ध स्तर पर भारत सरकार द्वारा प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत एक राशन कार्ड से कहीं भी राशन सामग्री भारत का नागरिक ले पाए, जो जल्द ही पूर्ण होने वाला है। भारत सरकार व प्रदेशों की सरकारे चाहती है कि आमजन आवश्यक राशन सही व गुणवत्तापूर्ण प्राप्त कर पाए। परंतु रसद विभाग की कड़ी निगरानी के बाद भी राशन डीलरों के अनेक प्रकार के गबन के प्रकरण सामने आना आम बात है। यहीं नही ऑन लाईन बनने वाले राशन कार्ड के माध्यम से प्रत्येक राशन कार्डधारक द्वारा प्रतिमाह राशन नही लिया जाता है। इस प्रकार के उपभोक्ता को खाद्य सुरक्षा से जोडक़र उसका सरकारी लाभ भी संबंधित राशन डीलर द्वारा ही लिया जा रहा है।  
राजस्थान, मध्यप्रदेश व अन्य राज्यों से अनेक बार खबरे आती है कि राशन डीलर ने बिना राशन लिए ही राशन कार्डधारक के नाम से राशन उठा लिया। कमोबेश यहीं स्थिति गत कई दशक से चली आ रही है। राशन वितरण सेवा सुचारू व सही कब होगी यह तो पता नही, लेकिन गत 5 दशकों से राशन वितरण में डीलरों की गड़बड़ी होने की शिकायत लगातार मिलती रहती है। गत माह कोविड-19 के लिए सरकार द्वारा दी जा रही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन सामग्री के दौरान कई घपले सामने आए है। जिसमें राजस्थान के बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा सहित अनेक जिलों में राशन विक्रेताओं द्वारा गबन किए जाने के समाचार मिले है।
      झुंझुनूं जिले का पिलानी कस्बा, जो बिड़ला नगरी के नाम से जाना जाता है। जिसमें एक विशेष प्रकार को केस सामने आया है। जिसके चलते विद्या विहार की पार्षद ने मुख्यमंत्री को शिकायत की है कि राशन डीलर ने पार्षद सहित 67 लोगों के राशन कार्डो में परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर कई वर्षो से राशन का घपला किया जा रहा है। जिसकी जांच में यह भी सामने आया कि बिड़ला ग्रुप के एक मुनिम के राशन कार्ड से भी ऐसे ही राशन सामग्री उठाई जा रही है, जबकि वे सामग्री नही ले रहे है। इस प्रकार राशन डीलर अभी भी विक्रेता का कार्य कर रहा है। हालांकि अनेक गबन के प्रकरण के चलते झुंझुनूं  रसद विभाग ने चार डीलरों की डिलरशिप खत्म कर, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। कमोबेश यहीं गफलत की स्थिति स्कूलों में मिडे मिल में जाने वाले राशन में दिखाई दे रही है।
शिक्षा विभाग ने 26 अपे्रल को अध्यापकों को आदेश दिया कि उनके यहां रखा हुआ राशन पंचायतों को दे दिया जाए। 28 अप्रैल को नया आदेश आया कि जरूरतमंद बच्चों को मिड डे मील का राशन छुट्टियों में भी दिया जाएगा। जिसके बाद विद्यालयों में राशन सामग्री भेजी गई, परंतु तोलने की मशीन ही ऐसी थी कि राशन सही वजन से नही दिया जा सका। इस राशन में वितरण करने वाला संबंधित डीलर सामग्री पूरी नही देता, यह शिकायत अध्यापक करते ही रहते है, परंतु इसका कोई हल नही पाता। आखिर यह राशन वितरण व्यवस्था में सही सुधार कब व कैसे होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। परंतु सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के प्रयास अभी भी सफल होते कहीं नजर नही आ रहे है।

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