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समाज में महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की आवश्यकता:ममता भूपेश

जयपुर, 13 फरवरी। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ममता भूपेश ने कहा है कि समाज में महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण बनाने की जरूरत के साथ प्रदेश की तरक्की में महिलाओं नेे पुरूषों के बराबर प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए अपनी भागीदारी का निर्वहन किया है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में महिलाओं ने पुरूषों के बराबर अपनी भूमिका निभाई तथा पूर्व राज्यपाल श्रीमती सरोजनी नायडू जैसी अनेक महिलाओं ने आजादी के आन्दोलन में भाग लिया।
भूपेश शनिवार को यहां श्रीमती सरोजनी नायडू के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाये गए राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यू.एन.एफ.जी.ए.) एवं महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महिला एवं बालिकाओं के विरूद्ध हिंसा की रोकथाम रणनीति के लिए आयोजित की गई राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में बोेल रही थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इन्दिरा गांधी को नमन् करते हुए आह्वान किया कि आज हमें समाज में रूढ़ीवादी भावना को खत्म करने के लिए हम सभी को संकल्प लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की तरक्की में यशस्वी मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के तहत राज्य सरकार द्वारा बेटी बचाओं व बेटी पढ़ाओं के संदेश को आगे बढ़ाते हुए समाज में जन जागरण का वातावरण तैयार कर अभियान भी चला रखा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप राज्य मेें इन्दिरा महिला निधी कार्यक्रम चलाकर प्रदेश की बालिकाओं व महिलाओं को विभिन्न प्रकार की टै्रनिंग व प्रशिक्षण दिये जा रहे थे। ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा कि महिला पहले की तुलना मेें अब ज्यादा जागरूक हुई है। इसके लिए अनेक महिला संगठनों व स्वंयसेवी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सम्मिलित हुए सभी संगठन महिला सुरक्षा रणनिति तैयार करने में भयमुक्त वातावरण बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान व सुझाव प्रदान कर राजस्थान की तरक्की के लिए कार्य करें।
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के शासन सचिव डॉ. के. के पाठक ने कहा कि राज्य में महिलाओं एवं बालिकाओं का सामाजिक आर्थिक एवं शैक्षनिक उत्थान के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभाग द्वारा अनेक योजना व कार्यक्रम संचालित किये जा रहे है। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए एवं पीड़ित महिला की सुनवाई एवं सहायता के लिए वन स्टॉप सखी केन्द्र एवं महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र, महिला हेल्पलाईन, एवं राज्य महिला आयोग कार्यरत वन स्टॉप सेन्टर में किसी भी अपराध एवं हिंसा से पीड़ित महिलाओं/बालिकाओं को आपातकालीन स्थितियों में भी त्वरित राहत प्रदान की जाती है। इसके तहत महिलाओं व बालिकाओं को परामर्श, पुलिस एवं चिकित्सा सुविधा तथा आवश्यकता अनुसार आश्रय व्यवस्था भी प्रदान की जाती है।
इस अवसर पर महिला अधिकारिता विभाग की आयुक्त रश्मि गुप्ता ने कहा कि समाज में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ना चिंता का विषय होने के साथ एक सामाजिक बुराई भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला को हिंसा मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा महिलाओं में जागरूकता पैदा करने के लिए समय समय पर अनेक कार्यक्रम चलाये जाते है। जिसमें गृह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग सहित अनेक विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
इस अवसर पर समेकित बाल विकास सेवाएं की निदेशक डॉ. प्रतिभा सिंह यू.एन.एफ.पी.ए. के राज्य समन्वयक सुनील थॉमस जैकब स्टेरिंग कमेटी की अध्यक्ष निशा सिद्धु, बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं की प्रदेश ब्राण्ड एम्बेसेडर डॉ. अनुपमा सोनी, पूर्व महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. पवन सुराणा, पुलिस विभाग के अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक सुनीता मीणा, राजस्थान स्टेट लीगल सर्विस ऑथोरिटी की निर्देशक अर्चना मिश्रा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।

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