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मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री के नाम जिला कलेक्टर को दिया ज्ञापन

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झुंझुनूं 23 जुलाई 2021(नि.सं. मनोज) | राज्य सरकार के शैक्षिक नियमों मे परीवर्तन के विरोध में गणित-विज्ञान संघर्ष समिति के संयोजक मनमीत चौधरी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया । ज्ञापन देने वालो मे विनोद चौधरी, जयवीर, विनोद जागिड़, तुषान शर्मा,सुनिल गोठवाल, विकास बुडा़निया, ओमप्रकाश झाझडि़या और सन्दीप वर्मा उपस्थिति रहे।  शिक्षामंजी द्वारा 7 जुलाई को दिये गये UG – PG मे समान विषय नियम के लाया गया है जिससे गणित-विज्ञान के लाखों शिक्षको को पदोन्नति और सीधी भर्ती मे शामिल नही किया जा सकता है । शिक्षामंत्री  द्वारा 7 जुलाई को नियम दिया गया जिसमे school प्राध्यापक भर्ती हेतु स्नातक एव स्नात्तकोत्तर मे समान विषय की बाध्यता नियम को गुणवत्ता की आड़ मे लाखो अभ्यर्थियों पर जबरन थोप दिया गया है जिसके कारण लाखो अभ्यर्थियों का भविष्य संकट मे नजर आ रहा है और वे मानसिक पीड़ा से गृस्त हो गये है ।
निम्न बिन्दूओं की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ-
1. इस नियम से ग्रामीण परिवेश एव पिछड़े क्षेत्र के लाखों छात्रों का 100% अहित हुआ है ।
2 . इससे राजस्थान के 3 लाख B.Ed, M.A. डिग्री धारी छात्र प्रभावित हुये है जिनके B.A मे समान विषय नही है जिससे वो मानसिक पीड़ा से ग्रस्त व बेरोजगार हो जायेंगे।
3 . वर्ष 2016 तक राजस्थान के 12 जिलों मे M.Sc हेतु PG कॉलेज थे वो भी जिला मुख्यालय पर स्थित थे इनमें भी M.Sc. हेतु सीमित मात्रा मे प्रवेश हो पाते है तथा इनमें भी छात्रों को मनवांछित विषय नही मिल पाते है जिसके कारण प्रदेश के लाखों छात्र B.Sc. के बाद M.Sc. नही कर पाते है तथा अब भी प्रदेश ऐसे 15 जिले है जहाँ PG मे science कॉलेज नही है।
4 . प्रदेश मे Asst. Profecer के स्वीकृत शैक्षणिक पदों में से 68% पद रिक्त है जिनमे से भी Science के 80% पद रिक्त है जिस कारण भी छात्र को M.Sc. करने मे कठिनाई होती है ।
5 . प्रदेश में M.Sc. हेतु प्राइवेट कॉलेज मनमाफिक 1 लाख – 2 लाख की फीस वसूलते है जिस कारण ग्रामीण परिवेश व पिछड़े क्षेत्रो के यहाँ तक की शहरी क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र M.Sc. नही कर पाते है और उनके सामने M.A. का ही विकल्प बचता है
6. प्रदेश मे किसी भी University व कॉलेज मे Science मे रूचिपूर्ण विषय नही मिल पाने के कारण भी अधिकतर छात्र M.A. की ओर रुख कर लेते है।
7. दिसम्बर 2018 तक राजस्थान के जिला मुख्यालय को छोड़कर अन्य जगह पर Arts के PG कॉलेज नही थे तथा कई जिले तो ऐसे थे जिनमे Arts मे भी 2018 से पहले PG कॉलेज नही थे
8. प्रदेश के कई ऐसे कॉलेज है जहाँ जो विषय UG मे होते है वो PG मे नही मिल पाते है और मिलते है तो उनके भी कॉलेज व्याख्याता के पद रिक्त होने के कारण या अन्य कारणों से छात्र उसी विषय मे PG नही कर पाते है
9. अधिकांश छात्र अन्य छात्रों या लोगो के सुझाव के आधार पर रुचि ना होते हुये भी science ले लेते है और जब उन्हे Graduation करते समय ज्ञान होता है तो वह अपनी रुचि के subject मे M.A. कर लेते है
10. कुछ छात्र परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण भी M.A. करने पर मजबूर हो जाते है
1 1 . उपरोक्त परिस्थितियों के कारण प्रतिवर्ष हजारों छात्र UG के बाद अपना विषय चैंज कर लेते है
नये शैक्षिक नियमों के कारण ऐसे लाखो छात्र प्रभावित हुये है और उनक अहित हुआ है उन्हे व्याख्याता भर्ती मे अयोग्य घोषित कर दिया है
> ऐसे छात्र UGC परीक्षा मे Asst. Prof . के योग्य है तो वह स्कूल व्याख्याता क्यो नही बन सकते है जबकि वह भी Exam फाइट करके व्याख्याता बनता है।
> भारत के किसी भी राज्य मे एवम UGC मे भी फर्स्ट ग्रेड व्याख्याता हेतु ये बाध्यता नही है
> पूरे भारत मे अभी तक PG के आधार पर व्याख्याता भर्ती होती आई है यहाँ तक की राजस्थान मे भी अभी तक PG के आधार पर ही व्याख्याता भर्ती होती आई है इस कारण भी बहुत से छात्रो ने रोजगार हेतु MA की ओर रुख किया

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माननीय महोदय आपसे सविनय निवेदन है कि आप इसे युवाओं की हितैषी सरकार के संज्ञान मे लाये कि माननीय शिक्षामंत्री के एक तुगलकी फरमान के कारण ऐसे 3 लाख PG B.Ed धारी छात्रों का भविष्य संकट मे डाल दिया है जिन्होंने अपने जीवन के अहम 2 वर्ष B.Ed और 2 वर्ष M.A. मे लगा दिये है अगर राज्य सरकार को ऐसा करना था तो पहले छात्रों को इसके लिए सुचित करना चाहिए था ये छात्र 3 वर्षों से व्याख्याता भर्ती की तैयारी में जुटे हुये थे विज्ञप्ति के इंतजार मे थे और सरकार ने विज्ञप्ति के दबाव मे नियम ही परिवर्तित कर दिये जिसने इन लाखों अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित कर बेरोजगार बना दिया है और उनकी डिग्री को एक कागज के टूकड़ो मे बदल दिया है तो सरकार से अब सवाल यह है कि ऐसे M. A. , B.Ed डिग्रीधारी अब कहाँ जायेगा वो मानसिक पीड़ा , तनाव से ग्रस्त हो जायेगा और असामाजिक गतिविधियों की ओर भी आकर्षित हो सकता है
अतः राज्य सरकार एवं माननीय शिक्षामंत्री जी से मेरा सविनय अनुरोध है कि वह अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर मध्यमार्ग निकाले और ऐसे छात्रों को जिन्होने 2021 तक डिग्री अर्जित कर ली है उन्हे इस नियम से छूट प्रदान की जाये तथा उन्हे व्याख्याता भर्ती में बैठने हेतु अनुमत किया जाये और उनके भविष्य के लिए न्यायसंगत निर्णय किया जाये ।

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