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आइये ! मिलकर टीबी को हरायें

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लेखक – भूपेश दीक्षित
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, राजस्थान

बीते एक सदी से भी अधीक समय से विश्वभर में क्षय रोग (टीबी) एक गहन शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौती बनी हुई है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में संक्रामक कारकों से होने वाली मृत्यु के शीर्ष दस कारणों में क्षय रोग एक प्रमुख कारण है । ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2020 के अनुसार वर्ष 2019 में विश्वभर में अनुमानित एक करोड़ लोग टीबी से बीमार हुए जिनमे से 15 वर्ष से कम आयु के 12 लाख बच्चों में टीबी विकसित हुई । इंडिया टीबी रिपोर्ट 2020 के अनुसार वर्ष 2019 में भारत में 24 लाख से अधीक क्षय रोग के मामले अधिसूचित हुए जो कि दुनिया में सबसे अधीक थे जिनमे से करीब 6 प्रतिशत मामले यानि कि 1.5 लाख से अधीक क्षय रोग के मामले 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पाए गए । विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 84 देशों से संकलित अनंतिम आंकड़ें इंगित करते है कि कोविड-19 महामारी की वजह से वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में 14 लाख कम लोगों को तपेदिक की देखभाल मिली जो कि वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में टीबी देखभाल में 21 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है । इस मामले में भारत में 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है जो कि चिंतनीय है ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2019 में दुनियाभर में टीबी से कुल 14 लाख लोगों की मृत्यु हुई (एचआईवी वाले 2,08,000 लोगों सहित) । वर्ष 2019 में भारत में भी टीबी के कारण 79144 लोगों की मृत्यु हुई । विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक कोविड-19 महामारी की वजह से वर्ष 2020 में टीबी का पता लगाने और देखभाल में कमी के प्रभाव के परिणामस्वरूप अनुमानित लाख अतिरिक्त लोगों की मृत्यु टीबी के कारण हो सकती है जिससे दुनिया एक दशक पीछे यानी कि 2010 में टीबी मृत्यु दर के स्तर पर आ जाएगी । अतः इसे रोकने के अभी से ध्यान देते हुए तत्काल कार्य करने की आवश्यकता है ।

वैश्विक स्तर पर पाया गया है कि कुपोषण, तंबाकू उत्पादों का सेवन, एचआईवी/एड्स और डायबिटीज व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है जिसके कारण टीबी होने का खतरा व टीबी से होने वाली मौत कई गुना बढ़ जाती है । फेफड़ों की बीमारी के रूप में, टीबी को कोविड-19 रोगियों में उच्च मृत्यु दर से भी जोड़कर देखा गया है । ऐसे में यह नितांत आवश्यक हो गया है कि सभी देश कोविड-19 को नियंत्रित करने के साथ-साथ अपने यहाँ टीबी, कुपोषण, तंबाकू उत्पादों का सेवन, एचआईवी/एड्स और डायबिटीज को भी नियंत्रित करने का प्रयास लगातार जारी रखें ।

वर्ष 2021 के विश्व टीबी दिवस से पहले आयोजित किये गए एक सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि “टीबी को खत्म करने के लिए हमारा सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि हम इसे मात्र शारीरिक रोग मानना बंद करें क्योंकि यह एक सामाजिक बीमारी भी है तथा यह हम सभी के विकास में से जुड़ा एक मुद्दा भी है । टीबी के खिलाफ हमें एक जन आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है और बहुपक्षीय तथा एकीकृत कदम उठाए जाने की जरूरत है” ।

भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक भारत में टीबी को समाप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और इसे आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने टीबी के विरुद्ध साहसपूर्ण एवं महत्वाकांक्षी कार्यनीति बनायी है जिसके अंतर्गत अनेक नयी पहल जैसे टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान की शुरुआत करना, निजी क्षेत्र को शामिल करना, निक्षय पोषण योजना, नैदानिक नेटवर्क का विस्तार, आयुष्मान भारत – स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों का विस्तार, नयी औषधियाँ को शामिल करना, डिजिटल क्रियाकलाप आदि को क्रियान्वित किया है । कोविड-19 महामारी के इस दौर में टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति के उलटफेर से बचने के लिए व टीबी रोकथाम और देखभाल में सुधार लाने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि समस्तीपुर, मेवात, अहमदाबाद, दिल्ली, सूरत व फरीदाबाद में साक्ष्य आधारित अनुसंधान और नवाचार किये गए है जिनके अच्छे परिणाम मिले है और जिन्हें डब्लूएचओ ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस प्रोग्राम द्वारा स्थापित संग्रह में शामिल किया है जिससे बाकी देश भी सीख ले सकते है । आशा है कि सभी के सम्मलित प्रयासों से विश्व शीघ्र ही कोविड-19 महामारी और टीबी से मुक्त होगा ।
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