Rajasthan Update
Rajasthan Update - पढ़ें भारत और दुनिया के ताजा हिंदी समाचार, बॉलीवुड, मनोरंजन और खेल जगत के रोचक समाचार. ब्रेकिंग न्यूज़, वीडियो, ऑडियो और फ़ीचर ताज़ा ख़बरें. Read latest News in Hindi.

नागरिकता कानून: जानिए, देश में कब-कब हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन

ऐतिहासिक छात्र आंदोलन

1965

तमिलनाडु में हिंदी के खिलाफ

वैसे तो तमिलनाडु में दशकों से हिंदी के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था, लेकिन 1963 के आधिकारिक भाषा अधिनियम ने गुस्सा बढ़ा दिया, जिसमें अंग्रेजी के साथ हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाया गया था। 1964 में राज्य की कांग्रेस सरकार ने तीन भाषा फार्मूला पेश किया, जिसके बाद छात्र सड़कों पर उतर गए। कई छात्रों ने आत्मदाह किया और हिंसा में 70 लोगों की मौत हो गई। इसकी वजह से कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

1974

नवनिर्माण आंदोलन

20 दिसंबर 1973 को, अहमदाबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने छात्रावास के भोजन में 20% शुल्क वृद्धि के खिलाफ आंदोलन चलाया। गुजरात विश्वविद्यालय में तीन जनवरी, 1974 को हड़ताल के दौरान पुलिस और छात्रों में झड़पें हुईं। छात्र मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल का इस्तीफा मांग रहे थे। 44 शहरों में कर्फ्यू लगाया गया और सेना बुलानी पड़ी। इंदिरा गांधी सरकार ने पटेल को इस्तीफा देने के लिए कहा। उन्होंने नहीं माना तो राज्य सरकार को भंग कर दिया गया।

1974

जेपी आंदोलन

जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चतरा संघर्ष समिति ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, चुनावी सुधार, रियायती भोजन और शिक्षा सुधारों को लेकर आंदेलन किया। यह अहिंसक विरोध था, जो पटना विश्वविद्यालय से शुरू हुआ और उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों में कई शैक्षणिक संस्थानों में फैल गया। नीतीश कुमार, लालू प्रसाद, मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव उसी आंदोलन से निकले।

1975

आपातकाल के खिलाफ

आपातकाल के खिलाफ देश के कई विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों से एक भूमिगत आंदोलन शुरू हुआ। इसमें शिक्षक, छात्र और कॉलेज स्टॉफ शामिल हुए। पर्चे और पत्रक बांटे गए। विरोध कर रहे तत्कालीन दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष अरुण जेटली और चतरा संघर्ष समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश नारायण सहित 300 से अधिक छात्र संघ नेताओं को जेल जाना पड़ा।

1979-1985

असम आंदोलन

असम में अवैध प्रवासियों के खिलाफ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने आंदोलन शुरू किया, यही संगठन अब संशोधित नागरिकता अधिनियम का विरोध कर रहा है। 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश से आए लोगों से असमिया लोगों की पहचान की रक्षा करना इस आंदोलन का मकसद था। इसमें तमाम क्षेत्रों के लोग और छात्र शामिल हुए, और 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ यह समाप्त हो गया। इसके बाद छात्र नेता प्रफुल्ल महंत, जो तब असम गण परिषद का नेतृत्व करते थे, 1985 में 35 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बने।

1990

मंडल आंदोलन के खिलाफ

सरकारी नौकरियों में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के खिलाफ देशभर में छात्रों ने आंदोलन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय से इसकी शुरुआत हुई और कुछ ही दिनों में यह देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में फैल गया। कई जगह हिंसक प्रदर्शन हुए। छात्रों ने परीक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और वीपी सिंह की सरकार चली गई।

2006

आरक्षण के खिलाफ आंदोलन

आरक्षण के खिलाफ यह दूसरा आंदोलन था। यूपीए सरकार ने सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की थी, जिसके विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए।

2014

जादवपुर विश्वविद्यालय

जादवपुर विश्वविद्यालय में पुलिस ने एक छात्र की पिटाई कर दी थी, जिसके खिलाफ छात्र सड़क पर उतर गए। उनका आरोप था कि कुलपति ने पुलिस को कैंपस में आने की अनुमति कैसे दे दी। विरोध के बाद कुलपति को हटा दिया गया।

2016

रोहित वेमुला प्रकरण

हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला ने फांसी लगाकर जान दे दी। इसके बाद देशभर में दलित छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। उनके समर्थन में कई राजनीतिक दल भी सामने आए।

2016

जेएनयू आंदोलन

आतंकी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में आंदोलन हुए। एक कार्यक्रम हुआ जिसमें शामिल होने के लिए छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर राजद्रोह का आरोप लगा और उन्हें गिरफ्तार किया गया। जेएनयू ने जांच के बाद 21 छात्रों पर कार्रवाई की।

Leave A Reply

Your email address will not be published.