Rajasthan Update
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केंद्र सरकार द्वारा एफसीआरए में परिवर्तन हजारों जुनूनी युवाओं के लिए खोलेगा ‘बेरोजगारी’ के द्वार देश में विदेशी मुद्रा का रास्ता बंद होने के साथ ही बड़े स्तर पर होने वाले सैकड़ों सामाजिक गतिविधियां होंगी बंद

लेखक,

राजन चौधरी, स्वतंत्र पत्रकार झुंझुनूं।

राजस्थान में सेवा का जुनून लेकर काम करने के लिए हर वर्ष सैकड़ों युवा विदेश या भारत के नामी गिरामी मैनेजमेंट संस्थाओं में पढ़ाई कर ग्रामीण व कच्ची बस्तियों में काम करने आते है। जिन्हें गांव व बस्तियों में स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि के रूप में जाना जाता है। भारत सरकार के विदेशी अंशदान विनिमयन अधिनियम (एफसीआरए) में परिवर्तन के बाद हजारों युवा बेरोजगार हो जाएंगे तथा प्रदेश में प्रतिवर्ष 150 से 175 करोड़ रूपये की विदेशी सहायता भी लगभग बंद हो जाएंगी। साथ ही समाजसेवा का जुनून लेकर समुदाय में परिवर्तन करने की चाह रखने वालों की संख्या में भारी कमी आने लग जाएंगी।

वर्ष 2010 के बाद ही एफसीआरए में परिवर्तन कांग्रेस सरकार ने प्रांरभ कर दिया था। जहां वर्ष 2015 के बाद भाजपा सरकार ने लगातार परिवर्तन जारी रखे है। यह सही है कि एफसीआरए में सुधार की जरूरत थी, लेकिन ऐसा सुधार किस काम का जिसके कारण विदेशी पैसा भारत में ही नही आए। राजस्थान के विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की हजारों लड़कियोंं व कच्ची बस्तियों के परिवार के बच्चों को छात्रवृति दी जाती है। नये कानून से अब ऐसा हो पाना मुश्किल हो जाएगा। राजस्थान विदेशी अंशदान लेने के लिए 461 स्वैच्छिक संगठन पंजीकृत है। जिसमें से 200 से 225 संगठनों को ही नवाचार करने के साथ-साथ वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, वृद्धा आश्रम, अनाथालय, आजिविका या जिस विषय में अभी तक कार्य नही हुआ हो, इन पर कार्य करने के लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं चेरिटी के पैसे अपने स्तर पर एकत्रित कर समाजसेवा के लिए देती है। इन कार्यो को फिल्ड स्तर पर काम करने वाले संगठन स्थानीय ही होते है, जो स्थानीय समुदाय की आवश्यकतानुसार कार्य करते है। नये कानून में राष्ट्रीय व अंतर्राष्टीय संस्थाएं भारत में अपने पैसे लाकर इन संस्थाओं को नही दे सकती। विदेशी दानदाता भारत में पंजीकृत एफसीआरए लेने वाली संस्था को सीधा पैसा दे सकता है, परंतु स्थानीय संस्था की उस स्तर पर पहुंच बनना संभव नही है। एफसीआरए के नये कानून से स्वैच्छिक संगठनों के काम करने में भारी कमी आएगी। वहीं देश व प्रदेश में आने वाली करोड़ रूपये की चैरिटी के माध्यम से विदेशी मुद्रा का नुकसान भी हो जाएगा।

राजस्थान में काम करने वाले अनेक संगठनों के जुनूनी लोगों ने अनेक कानून बनवाये है। जैसे सूचना का अधिकार, मनरेगा, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम के लिए पीसीपीएनडीटी एक्ट, बाल अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून जैसे पोकसों एक्ट, तंबाकू उत्पादों से होने वाले कैंसर को रोकने के लिए कोटपा 2003, गर्भ समापन सेवाओं के लिए एमटीपी एक्ट, घरेलू हिंसा रोकथाम, बाल विवाह, नि:शुल्क दवा व जांच योजना, जैनेरिक दवाएं, स्थानीय निकायों में महिलाओं का आरक्षण, साक्षरता अभियान सहित अनेक नवाचार इन स्वयंसेवी संगठनों के जुनूनी लोगों द्वारा प्रयोग के रूप में किये गए और राज्य या राष्ट्रीय सरकारों ने बाद में उन्हें स्वीकार कर सरकारी योजनाओं में लागु किया है। भारत सरकार एफसीआरए में किये गए बदलावों में सुधार नही करती है तो राजस्थान के हजारों युवाओं की नौकरी छूट जाएगी। वहीं नये काम का रास्ता भी बंद हो जाएगा। राजस्थान में किये गए नवाचारों की राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी है, लेकिन अब एफसीआरए में हुए बदलाव के बाद क्या आगे ऐसे नवाचार करने के लिए जुनूनी लोग आ पाएंगे यह बड़ा सवाल उभरकर सामने आ रहा है।

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