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आयुर्वेद वैकल्पिक नहीं, स्थापित और कारगर चिकित्सा पद्धति है:रघु शर्मा

जयपुर, 13 नवंबर। आयुर्वेद मंत्री डाॅ.रघु शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद वैकल्पिक नहीं अपितु स्थापित व कारगर चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद प्राचीन काल से संस्कृति व परंपरा का हिस्सा रही है। कोविड के दौर में भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से चिकित्सा के सुखद परिणाम मिल रहे हैं।

शर्मा शुक्रवार को इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान के सभागार में आयोजित धनवंतरि जयंती व पंचम आयुर्वेद दिवस के राज्य स्तरीय समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की तीनों पद्धतियों ने कोरोनाकाल में संक्रमितों को राहत पहुंचाई है। सरकार के आयुर्वेद व भारतीय चिकित्सा विभाग ने इस दौर में 31 लाख से अधिक लोगों को काढ़ा उपलब्ध कराया, वहीं गिलोय चूर्ण व अन्य औषधियों का भी वितरण किया।

आयुर्वेद मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए मेडिको टूरिज्म और औषधीय प्लांटेशन के सफल क्रियान्वयन को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजस्थान को मेडिको टूरिज्म हब बनाने के लिए 20 स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। यहां नेचुरोपैथी, पंचकर्म, योगा सहित कई पदधतियों के सेन्टर आफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।

डाॅ.शर्मा ने बताया कि विभाग के 3500 से अधिक औषधालयों व चिकित्सालयों में कार्मिकों ने कोरोना के दौर में सराहनीय कार्य किया है। विभाग के पांच हजार से अधिक चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों ने कोविड प्रबंधन के दौरान अन्य कोरोना वाॅरियर्स के साथ बेहतरीन कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सरकार निकट भविष्य में मेडिकल व आर्गेनिक फाॅर्मिंग पर भी विशेष ध्यान दे रही है। अन्य जिंसों की तरह औषधीय पादपों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाएगा। जिससे कि इनकी खेती को भी बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयुर्वेदिक सेवाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकार नई नियुक्तियों और संस्थाओं को विकसित करने के लिए कार्य रही है। हाल ही में जोधपुर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की शुरुआत और अजमेर व जोधपुर में दो होम्यापैथी काॅलेजों की घोषणा इस दिशा में उठाए गए कदम है। ये प्रदेश के पहले सरकारी होम्यपैथी काॅलेज होंगे, जिनके निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

डाॅ.शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद के आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। प्रतापनगर स्थित आयुष केन्द्र में साढ़े चार करोड़ की लागत से 50 बैड का अस्पताल निर्मित किया गया है। यही आने वाले दिनों में एक हजार आयुष चिकित्सक और कम्पाउंडरों की भी भर्ती की जाएगी।

आयुर्वेद मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार कोविड नेगेटिव आने के बाद भी कई घातक बीमारियां मरीज को घेर रही हैं। ऐसे में पोस्ट कोविड मैनेजमेंट में आयुर्वेद महती भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है।

आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा विभाग के शासन सचिव श्री राजेश शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में कोविड संक्रमितों को आयुर्वेद पद्धति द्वारा राहत दी जा रही है। उन्होंने निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे काढे और अन्य औषधियों के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर निदेशक श्रीमती सीमा शर्मा ने भी विभाग द्वारा किए गए कार्यों के बारे में बताया।

समारोह के दौरान रोग निदान एवं विकृति विज्ञान विभाग, एनआईए, जयपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्री कृष्ण खांडल ने बताया कि आयुर्वेद ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित चिकित्सकीय पद्धति है। यदि इसे मूल स्वरूप में ही अपनाया जाए तो इससे लाइलाज बीमारियों का भी इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में प्रकाशित होने वाले विभिन्न साइंस जर्नलों में आयुर्वेद पद्धति को लेकर चर्चा की जा रही है।

इंडियन मेडिसिन बोर्ड के चेयरमैन प्रोफेसर महेश चंद्र शर्मा ने आयुर्वेद पर फैलाए जा रहे भ्रम को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजस्थान में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूिमका निभा सकता है। भरतपुर, जयपुर, अजमेर, उदयपुर जैसे जिले आयुर्वेद मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित होने की क्षमता रखते हैं।

जयंति समारोह में आयुर्वेद के लिए उल्लेखनीय कार्य करने कार्मिकों और भामाशाह को सम्मानित किया गया। इनमें डाॅ.सुरेश चंद शर्मा, डाॅ विजेन्द्र कुमार शर्मा, सौरभ सिंह हाड़ा, डाॅ.कृष्ण चंद्र गौतम, डाॅ.सुनील कुशवाहा, गोपाल लाल मीणा, रामेश्वर दयाल शर्मा, रोहित मौर्य, भावेश गौतम, मुकेश कुमार मथुरिया, लीलू सिंह को सम्मानित किया गया।

समारोह का मंच संचालन आयुर्वेद के विशेषाधिकारी डाॅ मनोहर पारीक ने किया, जबकि उप सचिव राजेन्द्र चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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