Rajasthan Update
Best News For rajasthan

दिल्ली चुनाव में मुद्दे पर हावी रहा कामकाज

डॉ.भरत मिश्र प्राची

स्वतंत्र पत्रकार

दिल्ली विधान सभा चुनाव में दिल्ली की सर्वाधिक जनता ने आप सरकार के कामकाज पर अपनी मोहर लगा दी है जिससे इस बार के चुनाव में आप को जनादेश फिर से मिल गया है। विपक्ष के मुद्दों को दिल्ली की आम जनता ने नकार दिया है। जब कि चुनाव में काम के वजाय मुद्दें प्रभावित होते रहे है। चुनाव पूर्व इस पर विशेष रूप से पूरे देश की निगाहें टिकी रही कि चुनाव को कौन से पक्ष प्रभावित कर पायेंगे,भाजपा के राष्ट्रवाद के नारे या दिल्ली सरकार के द्वारा बताये जा रहे कामकाज पर चुनाव परिणाम दिल्ली के सरकार के कामकाज पर आमजन की सहमति को दर्शा रहा है। इस चुनाव में भाजपा द्वारा मुख्य रूप से उठाये शाहीन बाग के मुद््दे दिल्ली के अवाम को बरगला नहीं पाये। दिल्ली आप सरकार के अपने कार्यकाल में गिनाये प्रमुख कार्य फ्री बिजली, पानी, जनता क्लीनिक, बेहतर शिक्षा, सीसी कैमरे, ईवन-ओड प्रयोग, महिलाओं को फ्री बस यात्रा, वरिष्ठजनों को तीर्थ यात्रा एवं भ्रष्टाचार पर लगाम आदि पर दिल्ली की जनता ने अपनी मोहर लगाा दी है। जब कि इस चुनाव में भाजपा ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी थी पर दिल्ली चुनाव में आम जन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। चुनाव परिणाम में सरकार का कामकाज उभर कर सामने आया।

जब कि राजस्थान प्रदेश में पूर्व में कांग्रेस सरकार द्वारा दी गई आमजन को निःशुल्क चिकित्सा, जांच एवं दवाई की योजना चुनाव में प्रदेश की अवाम को प्रभावित नहीं कर पाई थी एवं विधान सभा चुनाव में उसे मात्र 21 सीटों पर संतोष करना पड़ा था तब के चुनाव में मोदी लहर के आगे कांग्रेस के कई दिग्गज नेता व मंत्री तक चुनाव हार गये थे। पर दिल्ली विधानसभा चुनाव में मोदी का कोई करिश्मा काम नहीं आया। दिल्ली की जनता ने सरकार के कामकाज पर अपनी मोहर लगा दी। लोकतंत्र के लिये इसे अच्छा ही माना जायेगा जहां चुनाव में सरकार का कामकाज महत्वपूर्ण रहा ।

इस चुनाव में भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस भी आमजन का विश्वास नहीं जीत पाई। कांग्रेस का अपने 15 वर्षो के शासनकाल में किये विकास कार्यो का उल्लेख किया जाना भी आमजन को अपने पक्ष में नहीं कर सका। वैसे इस चुनाव में पहले विधान सभा चुनाव से 5 प्रतिशत कम भी रहा पर इसका प्रभाव आप के जीत में ज्यादा अन्तर का नहीं रहा । इस चुनाव में भाजपा के सांसद परवेश वर्मा अपने बोल के चलते विवादों में उलझे रहे। चुनाव को केन्द्र सरकार की नागरिकता कानून एन आर सी एवं सीएए ने भी प्रभावित किया है। कांग्रेस के पास पूर्व जैसा नेतृत्व दिल्ली की जनता को नजर नहीं आया जिससे चुनाव में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। एक बात और इस चुनाव में प्रमुख रही कि जनता ने भड़काउ नेतृत्व को नकार दिया। आप के वोट बैंक में किसी तरह की कमी नजर नहीं आई। यदि आप के वोटर बिखरते तो राजनीतिक लाभ भाजपा के खाते में जाता पर दिल्ली चुनाव में यह स्थिति नहीं उभर पाई। ऐसा माना जा रहा था कि चुनाव से पूर्व केन्द्र सरकार का आया बजट दिल्ली की जनता का मिजाज बदल देगा पर ऐसा भी कुछ नहीं हुआ। आप का दामन छोड़ भाजपा में गये कपिल मिश्रा एवं कांग्रेस का दामन थामकर चुनाव में उतरी अलका लम्बा को हार का सामना करना पड़़ा।

कई जगह जीत का अन्तर भले कम रहा हो , चुनाव में आप का वोट प्रतिशत पहले से घटा हो, भाजपा का बढ़ा हो पर जो जीता वहीं सिकन्दर। दिल्ली की जनता ने फिर से केजरीवाल के नेतृत्व में अपना विश्वास जताया है। पूर्व दिल्ली का विधान सभा चुनाव भाजपा ने चर्चित महिला अधिकारी किरण वेदी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर लड़ा था पर उसे सफलता नहीं मिली थी।

इस बार का चुनाव बिहार- यूपी के चर्चित भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी को आगे करके लड़ा पर इस बार भी उसे सफलता हासिल नहीं हुई। चुनाव में केवल आप सरकार का कामकाज दिल्लीवासियों को पसन्द आया जिससे पूर्व जैसी जीत हासिल हुई।
इस चुनाव में विशेष रूप से हनुमान जी भी चर्चा में छाये रहे जिनके दर्शन को लेकर जो विवादों में घिरा रहा वहीं मंगलवार को आये परिणाम में दल सहित सर्वाधिक सीट लेकर विजयी रहा।

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More