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मंडावा विधानसभा में कद्दावर तक नहीं पार कर सके थे नैया पहली बार मंडावा में खिला कमल

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झुंझुनूं 21 दिसम्बर। राजस्थान के रेतीले रण में भित्ति चित्र, हवेलियों, किलों वाली मंडावा विधानसभा की सम मरुस्थलीय पट्टी इस बार भगवा हो गई है। राजस्थान में भाजपा का किला धाराशाई हो गया लेकिन आजादी से आज तक पार्टी के लिए यह अभेध किला इस बार फतह हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी कैलिफोर्निया से एमबीए रीटा चौधरी संभवतया यहां की राजनीति ही नहीं समझ सकी इसलिए ही सट्टा बाजार से लेकर हर सर्वे में जीती हुई बाजी नजदीकी मुकाबले में हाथ से निकल गई। रीटा चौधरी भाजपा की हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाने वाली राजनीति को दोष देती हैं तो बागी इसके लिए रीटा को ही जिम्मेदार ठहराते नजर आ रहे हैं।

पिता ने रीटा चौधरी को राजनीति में आगे बढ़ाया:—

रीटा चौधरी के पिता रामनारायण चौधरी कांग्रेस के बड़ें कद्दावर जाट नेता रहे। उन्होंने पहले अपने पुत्र राजेन्द्र चौधरी को आगे बढ़ाया और उप जिला प्रमुख तक पहुंचाया बताया जाता है कि इस बीच राजेन्द्र चौधरी के दूसरी शादी कर लेने से पारिवारिक विवाद हो गया और वर्ष 2008 में रामनारायण चौधरी ने रीटा को कांग्रेस की टिकट दिलवा दी। पिता का सिर पर हाथ, पढ़ा-लिखा चेहरा व महिलाओं चेहरा होनें के कारण रीटा चौधरी चुनाव जीत गई। इस बीच उनके पिता दुनिया से चले गए तो वर्ष 2013 में रीटा का टिकट कांग्रेस से काट दिया गया यहां से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉं.चन्द्रभान कांग्रेस की टिकट पर उतरे और जमानत जब्त करवा बैठे। वहीं बागी होकर चुनाव लड़ने वाली रीटा चौधरी ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा, दूसरे नंबर पर रहीं लेकिन बाजी निर्दलीय नरेन्द्र खीचड़ ले बैठे। दरअसल मंडावा विधानसभा में जाटों के बाद सबसे अधिक मुस्लिम आबादी है। भाजपा के नरेन्द्र खीचड़ से सीधी टक्कर होने की वजह से मुस्लिम वोट पूरी तरह से कांग्रेस की रीटा चौधरी को मिलता दिखाई दे रहा था। इस बीच चौथी बार चुनाव लड़ रहे नरेन्द्र खीचड़ ने इसमें दोनों तरीके से खेल खेला। बिसाउ नगरपालिका चैयरमैन हारून खत्री के माध्यम से मुस्लिम वोटों को अपनी ओर खींचा वही मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों से व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़ाव रखा लेकिन साथ ही हिन्दू मतों को भी इसी बात पर गोलबंद कर दिया।

चुनाव से ऐनवक्त पहले हुई कार्रवाई भी रीटा चौधरी को ले गई हार की और:—

कांग्रेस ने इस चुनाव में सीधे सीधे-चुनाव लड़ रहे बागियों पर तो जरूर कार्रवाई की थी लेकिन जिले स्तर के नेताओं पर सीधी कार्रवाई संभवतया मंडावा विधानसभा में ही हुई थी। चुनाव से दो दिन पहले ही रीटा चौधरी के भाई पूर्व उपजिला प्रमुख राजेन्द्र चौधरी, जिला परिषद सदस्य प्यारेलाल ढुकिया, प्रधान सुशीला सीगडा व पूर्व जिलाध्यक्ष हाफिज खान को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। ये बागी अब भी कहते हैं कि वे पार्टी के साथ थे लेकिन कार्रवाई होने से कहीं ना कहीं वे खुलकर विरोध में आ गए और रीटा चौधरी को नुकसान उठाना पड़ा।

कद्दावर तक नहीं पार कर सके थे नैया पहली बार खिला कमल:-

कांग्रेस के सामने भाजपा ने कई बार अपने कद्दावर नेताओं को भी मैदान में उतारा। कलक्टर रहे आईएएस भी उतरे लेकिन हर बार कांग्रेस यहां से विजय रही। राजस्थान में सबसे अधिक बार विधायक बनाने का रिकार्ड रखने वाली व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह ने भी मंडावा से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वे भी भाजपा का यहां खाता नहीं खोल सकी थी। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रामनारायण चौधरी के सामने भाजपा ने एक बार कलेक्टर रहे आईएएस रामेश्वर सिंह को भी मैदान में उतारा था मुकाबला कड़ा रहा था, कई जगह मारपीट के बाद रिपोलिंग की स्थिति आई थी इसके बावजूद कांग्रेस जीतने में सफल रही थी। इस प्रकार राजस्थान में भाजपा पार्टी ने कई बार यहां सरकार बनाई, तीन चौथाई से अधिक 163 सीटें हासिल कर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया लेकिन झुंझुनूं जिले की मंडावा का किला उसके लिए अभेध था, जो इस बार ढहा लिया गया है।

बागी ने बदला इतिहास:—
मंडावा में न तो जनसंघ जीती थी और ना भाजपा। यहां के 13 चुनावों में 8 बार कांग्रेस विजेता रही थी। वर्ष 1957 में अस्तित्व आई इस सीट से पहले भारतीय जनसंघ और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के जीतने के सारे प्रयास विफल ही रहे। यहां के 13 चुनावों में से 8 बार कांग्रेस,एक-एक बार सीपीआई, स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी(सेक्यूलर), जनता दल और निर्दलीय ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2013 में निर्दलीय नरेन्द्र कुमार ने जीते और भाजपा तीसरे स्थान पर रही। अबकी बार हुए विधानसभा चुनाव में तीन बार के बागी रहे विधायक नरेन्द्र खीचड़ पर पार्टी ने विश्वास जताया चुनाव से पहले ही विधायक नरेन्द्र खींचड ने यहां भाजपा का दामन थाम लिया था और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गौरव यात्रा के मंच से ही लगभग उनका टिकट फाइनल कर दिया था। अबकी बार नरेन्द्र खीचड़ यहां से 2321 मतों से चुनाव जीते हैं।

9 Comments
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