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खसरा रोग भारत में प्रति वर्ष 49 हजार 200 बच्चों की मौत का कारण बनता है: डॉ.दयानंद

दूसरे दिन भी 498 स्कूलों में 50 हजार से अधिक बच्चों ने खुशी-खुशी लगवाएं एमआर के टीके

झुंझुनूं। सोमवार से जिले में शुरू हुए मीजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान के तहत दूसरे दिन मंगलवार को भी जिले में 498 स्कूलों में 50 हजार से अधिक बच्चों ने खुशी-खुशी हंसतें टीके लगवाए। आरसीएचओ व अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. दयानंदसिंह ने बताया कि पहले दिन कुछ बच्चों को इंजेशकन के नाम का भय स्वभाविक था, जो दूसरे दिन अभियान के दौरान एक-दूसरे बच्चे को खुशी-खुशी टीके लगवाने के साथ समाप्त हो गया। सूरजगढ़ में मंगलवार को 6023 बच्चों को टीके लगवाये गए, जिसमें किसी बच्चे को किसी भी प्रकार की पीड़ा होना सामने नही आया। इसी प्रकार जिलेभर में बिना किसी गतिरोध के एमआर का टीके लगवाये गए। आरसीएचओ डॉ. दयानंद ने बताया कि मिजल्स का टीका 1963 से लगाया जा रहा है। अब तक इसके साइडइफेक्ट के रूप में किसी प्रकार की जन हानि या मौत का मामला सामने नही आया है। उन्होंने बताया कि यह टीका सौ फीसदी सुरक्षित है, इससे घबराने की आवश्यकता नही है। डॉ.सिंह ने आमजन से टीके को लेकर अफवाओं और भ्रमित करने वाली खबरों पर ध्यान नही देने की अपील की। डॉ. दयानंद ने बताया कि खसरा रोग भारत में प्रति वर्ष 49 हजार 200 बच्चों की मौत का कारण बनता है। जिसको रोकने का एकमात्र कारगर उपाय टीकाकरण ही है, इसलिए सभी अभिभावकों को पूरी जिम्मेवारी के साथ यह टीका अवश्य रूप से अपने बच्चों को लगवाना चाहिए। जिससे हमारा देश और समाज खसरा और रूबेला नामक वायरस जनित जानलेवा खतरनाक बीमारियों मुक्त हो सके। अभियान में जिले में कुल 5 लाख 60 हजार बच्चों को टीके लगाने का लक्ष्य लिया गया है।

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