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झुंझुनूं जिले में अभी तक हुए उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी का पलड़ा रहा है भारी

पांच उपचुनाव में चार बार विजयी रहा है कांग्रेसी प्रत्याशी, एक बार भाजपा ने खोला है खाता

इस बार मंडावा उपचुनाव में भाजपा की टिकट पर निर्भर है, कांग्रेस प्रत्याशी का भाग्य

झुंझुनूं (राजन चौधरी)। जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों में अभी तक पांच उपचुनाव हो चुके है और आगामी 21 अक्टूबर को मंडावा विधानसभा क्षेत्र में दूसरी बार उपचुनाव के लिए मतदान होगा। इसी में यह जिले का छठा उपचुनाव होगा। इससे पहले पांच बार उपचुनाव हुए, जिसमें चार बार कांग्रेस विजयी रही व एक बार भाजपा ने जीत दर्ज की। मंडावा विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस व भाजपा में ही कड़ा मुकाबला होने वाला है। इस उप चुनाव का परिणाम पुराने इतिहास के अनुसार होगा या नये अंदाज में यह तो वक्त ही बताएंगा, लेकिन मंडावा उपचुनाव को लेकर पूरे जिले के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी राजनैतिक माहौल काफी गर्म हो गया है।

राजनैतिक सूत्रों के अनुसार झुंझुनूं जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों में इस उपचुनाव से पहले पांच बार अलग-अलग समय में उपचुनाव हो चुके है। सबसे पहला उपचुनाव 1969 में खेतड़ी में हुआ था। 1967 में जीते बिसाऊ ठाकुर रघुवीरसिंह ने 1969 में इस्तीफा दिया था। जिस पर 1969 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के शीशराम ओला व हेमराज गुर्जर माधोगढ़ के बीच हुए मुकाबले में शीशराम ओला विजयी हुए थे।

दूसरा उपचुनाव 1983 में मंडावा विधानसभा के विधायक जनता पार्टी (चरणसिंह) के लच्छुराम की मृत्यु होने के कारण उपचुनाव हुए थे। जिसमें कांग्रेस के रामनारायण चौधरी व लोकदल प्रत्याशी के रूप में लच्छुराम के पुत्र दयाराम को चुनाव मैदान में उतारा गया था। इस चुनाव की कमान पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के हाथ थी। जिन्होंने दो चुनावी बड़ी सभा से चौधरी चरणसिंह की करवाई थी, लेकिन बावजूद भाजपा समर्थित लोकदल प्रत्याशी हार गया और कांग्रेस पार्टी की जीत हुई।

इसी प्रकार 1993 में खेतड़ी विधानसभा क्षेत्र में दूसरा उपचुनाव विधायक मालाराम गुर्जर की मृत्यु के कारण हुआ। जिसमें कांग्रेस से डॉ. जितेंद्रसिंह व भाजपा से मालाराम गुर्जर के पुत्र दाताराम गुर्जर के बीच चुनावी मुकाबला हुआ। जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहे।

वहीं 1993 में ही झुंझुनूं विधानसभा के हुए उपचुनाव में कांग्रेस से बृजेंद्र ओला व भाजपा से डॉ. मूलसिंह शेखावत के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें भाजपा विजयी रहीं।

इसी प्रकार वर्ष 2014 में सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय विधायक संतोष अहलावत के सांसद बन जाने के कारण खाली हुई सीट पर उपचुनाव हुए। जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार व भाजपा से डॉ. दिगम्बरसिंह के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहे। सूरजगढ़ की तरह ही इस बार मंडावा क्षेत्र में भी स्थानीय विधायक के सांसद बनने के कारण खाली हुई सीट पर उपचुनाव हो रहा है। जिसमें कांग्रेस व भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला होना माना जा रहा है।

कांग्रेस से पूर्व विधायक रीटा चौधरी की टिकट तय मानी जा रही है, वहीं भाजपा की टिकट पर कौन प्रत्याशी होगा, यह 30 सितंबर से पहले तय होने पर ही पता लग पाएगा। माना जा रहा है कि गत पांच उपचुनाव में रहे परिणामों के अनुसार इस मंडावा उपचुनाव का परिणाम कांग्रेस के पक्ष में ही जाने की संभावना बनी हुई है। बशर्ते भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा, सब उसी पर निर्भर रहेगा। इस उपचुनाव में किस पार्टी की जीत होगी व किसकी हार, यह तो वक्त बताएंगा, लेकिन किसी एक पार्टी की दिवाली शानदार मनेंगी यह तय है।

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